CAPF

CAPF में कैसे आए 61 IPS? बिना कैडर रिव्यू के रिटायर हुए 400 अफसर, 400 और सेवानिवृत्ति के करीब

भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में Central Armed Police Forces (CAPFs) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। सीमा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा, औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में CAPFs की तैनाती होती है।

लेकिन इन बलों के अधिकारियों के करियर और पदोन्नति से जुड़ा एक पुराना विवाद एक बार फिर चर्चा में है। मामला कैडर रिव्यू, पदोन्नति और CAPFs में IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से जुड़ा है।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान बताया गया कि लगभग 400 CAPF कैडर अधिकारी बिना अपेक्षित कैडर रिव्यू के सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि करीब 400 अन्य अधिकारी भी सेवानिवृत्ति की उम्र के करीब पहुंच चुके हैं। इसी दौरान यह सवाल भी उठा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी CAPFs में IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति क्यों जारी है और अब तक लगभग 61 IPS अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर CAPFs में शामिल हो चुके हैं।

इस पूरे मामले को समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि कैडर रिव्यू क्या होता है और CAPFs के अधिकारी इसकी मांग क्यों कर रहे हैं।

CAPF क्या है?

CAPF का मतलब Central Armed Police Forces है। भारत में केंद्र सरकार के अधीन कई सशस्त्र पुलिस बल काम करते हैं।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • CRPF – Central Reserve Police Force
  • BSF – Border Security Force
  • CISF – Central Industrial Security Force
  • ITBP – Indo-Tibetan Border Police
  • SSB – Sashastra Seema Bal
  • Assam Rifles को भी केंद्रीय सशस्त्र बलों की व्यापक व्यवस्था के संदर्भ में अलग भूमिका के साथ देखा जाता है।

इन बलों में बड़ी संख्या में अधिकारी और जवान काम करते हैं। इनके अधिकारियों की भर्ती, सेवा शर्तें, पदोन्नति और पदों की संख्या से जुड़ी व्यवस्था अलग-अलग नियमों के तहत चलती रही है।

कैडर रिव्यू क्या होता है?

सरल भाषा में कैडर रिव्यू का मतलब किसी सरकारी सेवा में उपलब्ध पदों, अधिकारियों की संख्या, अलग-अलग रैंकों की आवश्यकता और भविष्य की संगठनात्मक जरूरतों की समीक्षा करना है।

उदाहरण के लिए अगर किसी संगठन में:

  • अधिकारियों की संख्या बढ़ गई है,
  • काम का क्षेत्र बढ़ गया है,
  • नए पदों की आवश्यकता है,
  • किसी रैंक पर अधिकारियों की संख्या बहुत अधिक है,
  • या प्रमोशन में लंबे समय से रुकावट है,

तो सरकार कैडर की समीक्षा कर सकती है।

कैडर रिव्यू का उद्देश्य केवल पद बढ़ाना नहीं होता। इसका संबंध संगठन की वास्तविक जरूरत और अधिकारियों के करियर स्ट्रक्चर से भी होता है।

CAPFs में कैडर रिव्यू क्यों महत्वपूर्ण है?

CAPFs में अधिकारियों की एक बड़ी शिकायत लंबे समय से पदोन्नति में ठहराव को लेकर रही है।

यदि किसी अधिकारी को अगली रैंक पर जाने के लिए पर्याप्त पद उपलब्ध नहीं होते, तो वह कई वर्षों तक एक ही पद पर रह सकता है।

इससे दो समस्याएं पैदा होती हैं।

पहली, अधिकारी के करियर की गति धीमी होती है।

दूसरी, संगठन में वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों के बीच पदों का संतुलन प्रभावित हो सकता है।

इसी वजह से CAPF कैडर अधिकारी चाहते हैं कि संगठन की वास्तविक जरूरत के अनुसार नियमित कैडर रिव्यू किया जाए।

रिपोर्ट के अनुसार CAPFs में 2016 के बाद से ऐसा कैडर रिव्यू नहीं हुआ है।

विवाद की जड़ क्या है?

विवाद का एक बड़ा हिस्सा इस बात से जुड़ा है कि CAPFs में वरिष्ठ पदों पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति होती है।

IPS अधिकारी मूल रूप से भारतीय पुलिस सेवा का हिस्सा होते हैं। वे अपने राज्य या अन्य कैडर में सेवा करने के अलावा केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर भी जा सकते हैं।

CAPFs में भी कुछ वरिष्ठ पदों पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति का प्रावधान रहा है।

CAPF कैडर अधिकारियों का तर्क है कि अगर वरिष्ठ पदों पर बाहर से प्रतिनियुक्त अधिकारी आते हैं, तो इससे उनके अपने कैडर के अधिकारियों के लिए ऊंचे पदों तक पहुंचने और पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

इसी मुद्दे ने अब न्यायिक विवाद का रूप ले लिया है।

CAPF में 61 IPS अधिकारी कैसे पहुंचे?

हालिया सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि लगभग 61 IPS अधिकारी प्रतिनियुक्ति के जरिए CAPFs में ज्वाइन कर चुके हैं।

यह संख्या इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 2025 के अपने फैसले में CAPFs में IPS प्रतिनियुक्ति को वरिष्ठ स्तर तक धीरे-धीरे कम करने की बात कही थी।

CAPF कैडर अधिकारियों की ओर से सवाल उठाया गया कि यदि अदालत ने IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को कम करने का निर्देश दिया था, तो इसके बाद भी प्रतिनियुक्तियां क्यों बढ़ती दिखाई दे रही हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने भी यह जानना चाहा कि इन अधिकारियों की प्रतिनियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले से पहले की थीं या उसके बाद की।

हालांकि अदालत ने फिलहाल IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति पर तत्काल रोक लगाने से इनकार किया और कहा कि उसके सामने इस संबंध में पर्याप्त डेटा नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट का 23 मई 2025 का फैसला

इस मामले में 23 मई 2025 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला बेहद महत्वपूर्ण है।

संजय प्रकाश एवं अन्य बनाम भारत सरकार मामले में CAPFs के Group-A Executive Cadre से जुड़े अधिकारियों की समस्याओं पर विचार किया गया।

अधिकारियों की मुख्य शिकायतों में शामिल थे:

  • कैडर रिव्यू में देरी
  • पदोन्नति में ठहराव
  • सेवा नियमों में असमानता
  • NFFU से जुड़े लाभ
  • वरिष्ठ पदों पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति
  • करियर में आगे बढ़ने के सीमित अवसर

सुप्रीम कोर्ट ने CAPFs को Organised Group-A Service (OGAS) के रूप में मानने से जुड़े महत्वपूर्ण निर्देश दिए और कैडर रिव्यू तथा भर्ती नियमों की समीक्षा की दिशा में कदम उठाने को कहा।

OGAS का मतलब क्या है?

OGAS का पूरा नाम है: Organised Group-A Service

सरल शब्दों में यह ऐसी संगठित सरकारी सेवा व्यवस्था है जिसमें अधिकारियों के लिए निर्धारित कैडर स्ट्रक्चर, पदोन्नति व्यवस्था और करियर प्रोग्रेशन का एक व्यवस्थित ढांचा होता है।

CAPF अधिकारियों का कहना है कि उन्हें OGAS के अनुरूप मिलने वाले लाभों और करियर प्रोग्रेशन की व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू किया जाना चाहिए।

इसी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा NFFU यानी Non-Functional Financial Upgradation भी है।

NFFU क्या है?

NFFU का संबंध अधिकारियों को वित्तीय उन्नयन देने से है, खासकर तब जब किसी अधिकारी को निर्धारित समय के बावजूद वास्तविक पदोन्नति नहीं मिल पाती।

सरल उदाहरण से समझें:

मान लीजिए कोई अधिकारी लंबे समय तक एक ही रैंक पर काम कर रहा है क्योंकि उसके ऊपर जाने के लिए पर्याप्त पद उपलब्ध नहीं हैं।

ऐसी स्थिति में कुछ परिस्थितियों में वित्तीय लाभ देने की व्यवस्था अधिकारी की आर्थिक प्रगति को बनाए रखने में मदद कर सकती है।

CAPF अधिकारियों के मामले में NFFU भी लंबे समय से महत्वपूर्ण मांगों में शामिल रहा है।

400 अधिकारी बिना कैडर रिव्यू के रिटायर क्यों हुए?

यह इस पूरे विवाद का सबसे गंभीर हिस्सा है।

हालिया सुनवाई में CAPF कैडर अधिकारियों की ओर से बताया गया कि करीब 400 अधिकारी कैडर रिव्यू का लाभ मिले बिना ही सेवानिवृत्त हो गए।

इसके अलावा लगभग 400 और अधिकारी 60 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति के करीब हैं।

इसका मतलब है कि यदि कैडर रिव्यू और उससे जुड़े सेवा सुधारों में और देरी होती है, तो बड़ी संख्या में अधिकारी अपने पूरे करियर में अपेक्षित बदलाव का लाभ पाए बिना ही रिटायर हो सकते हैं।

यही कारण है कि यह मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का विषय नहीं रह गया है, बल्कि अधिकारियों के करियर और सेवा अधिकारों से भी जुड़ गया है।

कैडर रिव्यू में देरी का अधिकारियों पर क्या असर पड़ता है?

कैडर रिव्यू में देरी होने से सबसे बड़ा असर करियर प्रोग्रेशन पर पड़ सकता है।

अगर संगठन में उच्च पदों की संख्या जरूरत के अनुसार निर्धारित नहीं होती, तो अधिकारियों को प्रमोशन के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है।

इसका प्रभाव कई स्तरों पर हो सकता है:

  • पदोन्नति में देरी: अधिकारी लंबे समय तक एक ही रैंक पर रह सकता है।
  • करियर में ठहराव: सेवा के कई वर्षों के बाद भी अधिकारी को अपेक्षित जिम्मेदारी और पद नहीं मिल सकता।
  • मनोबल पर असर: लगातार प्रमोशन की प्रतीक्षा अधिकारियों के मनोबल को प्रभावित कर सकती है।
  • सेवानिवृत्ति से पहले अवसर कम होना:यदि कैडर रिव्यू बहुत देर से होता है तो पुराने बैच के कई अधिकारी रिटायर हो सकते हैं और उन्हें उसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पाता।

सरकार का क्या पक्ष है?

सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया है कि CAPFs की प्रकृति सामान्य नागरिक संगठित सेवाओं से अलग है।

CAPFs सुरक्षा से जुड़े संगठन हैं और इनमें केंद्र तथा राज्यों के बीच समन्वय भी महत्वपूर्ण है।

सरकार की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि CAPFs में IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति का एक कार्यात्मक उद्देश्य है और भर्ती तथा सेवा नियमों को बलों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

हालिया सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से यह बताया गया कि कैडर रिव्यू की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

CAPF अधिकारियों का पक्ष क्या है?

CAPF कैडर अधिकारियों का मुख्य तर्क है कि अगर वे वर्षों तक सेवा करते हैं और वरिष्ठ पदों पर पहुंचने के लिए निर्धारित करियर पथ है, तो उन्हें पदोन्नति के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।

उनका कहना है कि वरिष्ठ पदों पर लगातार बाहरी प्रतिनियुक्तियां होने से उनके कैडर में पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

इसीलिए वे चाहते हैं कि:

  • नियमित कैडर रिव्यू हो
  • भर्ती नियमों की समीक्षा हो
  • पदों का पुनर्गठन किया जाए
  • पदोन्नति के अवसर बढ़ाए जाएं
  • OGAS से जुड़े लाभ लागू किए जाएं
  • IPS प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था की समीक्षा हो

2016 के बाद कैडर रिव्यू क्यों चर्चा में है?

रिपोर्ट के अनुसार CAPFs में 2016 के बाद से कैडर रिव्यू नहीं हुआ।

CAPF अधिकारियों की ओर से यह भी कहा गया कि लगभग दस साल पहले हुए कैडर रिव्यू का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया क्योंकि उस समय इसे OGAS के संदर्भ में लागू नहीं किया गया था।

यही वजह है कि 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नया कैडर रिव्यू इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

सुप्रीम कोर्ट ने छह महीने का समय क्यों दिया था?

सुप्रीम कोर्ट ने 23 मई 2025 के फैसले में CAPFs में कैडर रिव्यू और भर्ती नियमों की समीक्षा के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने इस प्रक्रिया को छह महीने के भीतर पूरा करने की बात कही थी।

लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।

इसी कारण अब अदालत में यह सवाल उठा कि अदालत के निर्देश का पालन क्यों नहीं हुआ।

नया CAPF कानून भी चर्चा में क्यों आया?

हालिया सुनवाई में CAPF (General Administration) Act, 2026 का भी उल्लेख हुआ।

सरकार ने इस कानून को हाल ही में अधिसूचित किया है।

लेकिन CAPF कैडर अधिकारियों की ओर से यह तर्क दिया गया कि नया कानून सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले के अनुपालन का विकल्प नहीं हो सकता।

उनका कहना है कि कैडर रिव्यू की प्रक्रिया को अदालत के निर्देश के अनुसार पूरा किया जाना चाहिए।

क्या सुप्रीम कोर्ट ने IPS प्रतिनियुक्ति पर रोक लगा दी?

नहीं।

यह बात समझना बहुत जरूरी है।

हालिया सुनवाई में CAPF अधिकारियों की ओर से IPS प्रतिनियुक्ति पर रोक लगाने की मांग की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तत्काल रोक लगाने से इनकार किया।

अदालत ने कहा कि उसके सामने इस विषय पर पर्याप्त डेटा नहीं है।

इसलिए 61 IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को लेकर विवाद जारी है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने सभी प्रतिनियुक्तियां अवैध घोषित कर दी हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिया?

हालिया सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 23 मई 2025 के आदेश के बाद उठाए गए कदमों से संबंधित फाइलें पेश करने को कहा है।

अदालत ने विशेष रूप से यह जानना चाहा कि कैडर रिव्यू के निर्देश को लागू करने में देरी क्यों हुई।

केंद्र सरकार से इस संबंध में स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।

मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।

इस मामले का महत्व क्या है?

यह मामला केवल 61 IPS अधिकारियों या 400 रिटायर हुए अधिकारियों तक सीमित नहीं है।

यह भारत की CAPF व्यवस्था में करियर स्ट्रक्चर और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा बड़ा प्रश्न है।

एक तरफ सरकार को सुरक्षा बलों में अनुभवी अधिकारियों की जरूरत है और IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को प्रशासनिक एवं कार्यात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

दूसरी तरफ CAPF के अपने कैडर अधिकारियों के लिए भी पर्याप्त पदोन्नति और करियर प्रोग्रेशन जरूरी है।

इसलिए सरकार के सामने चुनौती दोनों आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाने की है।

आगे क्या हो सकता है?

अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण कदम कैडर रिव्यू को लेकर होगा।

यदि कैडर रिव्यू जल्दी पूरा होता है तो इससे:

  • अधिकारियों के प्रमोशन के अवसर स्पष्ट हो सकते हैं।
  • नए पदों की आवश्यकता का आकलन हो सकता है।
  • भर्ती नियमों में बदलाव हो सकता है।
  • वरिष्ठ पदों की संरचना स्पष्ट हो सकती है।
  • IPS प्रतिनियुक्ति की भूमिका पर भी पुनर्विचार हो सकता है।
  • लंबे समय से चली आ रही करियर स्टैगनेशन की समस्या को कम किया जा सकता है।

हालांकि अंतिम तस्वीर सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई और केंद्र सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों के बाद ही स्पष्ट होगी।

निष्कर्ष

CAPFs भारत की सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन बलों के अधिकारी कठिन परिस्थितियों में देश की सुरक्षा के लिए काम करते हैं। इसलिए उनके लिए एक स्पष्ट और प्रभावी करियर प्रोग्रेशन सिस्टम होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

61 IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति, करीब 400 CAPF अधिकारियों का कैडर रिव्यू के बिना रिटायर होना और लगभग 400 अन्य अधिकारियों का सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचना इस पूरे विवाद की गंभीरता को दिखाता है।

23 मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस विषय को एक स्पष्ट न्यायिक दिशा दी थी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उस फैसले के निर्देशों को जमीन पर कितनी तेजी से लागू किया जाता है।

आने वाले समय में कैडर रिव्यू, भर्ती नियमों में बदलाव और IPS प्रतिनियुक्ति इस मामले के तीन सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे रहेंगे।

अगली सुनवाई में अदालत केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और कैडर रिव्यू में हुई देरी पर क्या रुख अपनाती है, यह CAPF अधिकारियों के भविष्य के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।

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